बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा शुक्रवार को बड़हिया में अपनी लगातार पांचवीं विधानसभा जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन जश्न का यह नजारा देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। खुले जीप में सवार डिप्टी सीएम के बिल्कुल पास खड़े उनके कार्यकर्ताओं ने राइफलें और देशी कट्टे निकालकर लगातार हवाई फायरिंग शुरू कर दी।
दर्जनों राउंड गोलियां चलीं, धुएं का गुबार उठा और सड़क पर खाली खोखे बिखर गए।सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह थी कि यह सब कुछ विजय सिन्हा के ठीक सामने हो रहा था। वह माइक्रोफोन थामे जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, हाथ हिला रहे थे, लेकिन अपने ही समर्थकों द्वारा की जा रही खतरनाक फायरिंग को रोकने के लिए एक शब्द तक नहीं बोले।वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे शेयर करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि जिस सरकार के दो सबसे बड़े नेता “कानून-व्यवस्था” और “सुशासन” की दुहाई देते नहीं थकते, उसी सरकार के नंबर-2 नेता की रैली में अवैध हथियारों से फायरिंग हो रही हो तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
स्थानीय लोगों ने बताया कि फायरिंग इतनी तेज थी कि आसपास खड़ी भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग बच्चों को गोद में उठाकर भागे। रैली में मौजूद महिलाएं और बुजुर्ग डर के मारे सिर झुकाकर खड़े रहे। इसके बावजूद न तो डिप्टी सीएम ने टोका और न ही उनके सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने कोई हस्तक्षेप किया।घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी लखीसराय पुलिस ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। न किसी की गिरफ्तारी हुई, न हथियार जब्त किए गए। जानकारों का कहना है कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता होने की वजह से प्रशासन खामोश है।
बिहार में एनडीए की सरकार पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से सत्ता में है और हर चुनाव में “जंगलराज की वापसी नहीं होने देंगे” का नारा बुलंद करती रही है। लेकिन डिप्टी सीएम की रैली में खुलेआम हथियार लहराना और गोलियां चलाना यह बता रहा है कि कानून का डर कट्टाधारियों में खत्म हो चुका है, बशर्ते उनके पीछे सत्ता का संरक्षण हो। लखीसराय की जनता ने विजय सिन्हा को रिकॉर्ड मतों से जिताया था। अब सवाल यह है कि क्या जनता ने उन्हें यह अधिकार भी दिया था कि उनके बच्चों के सिर के ऊपर से गोलियां चलवाई जाएं ?
रिपोर्ट
अंकित शेखावत
