अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को एक बड़ा कूटनीतिक झटका देते हुए बोर्ड ऑफ पीस’ से उसका आमंत्रण वापस ले लिया है इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका–कनाडा संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है ट्रंप के इस कदम ने न केवल दोनों देशों के रिश्तों में नई खटास पैदा की है, बल्कि वैश्विक मंच पर शांति और कूटनीति से जुड़े प्रयासों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैंसूत्रों के मुताबिक बोर्ड ऑफ पीस एक ऐसा मंच माना जाता है, जहां वैश्विक शांति, संघर्ष समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है कनाडा को इसमें शामिल किया जाना पहले अमेरिका की ओर से एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा था हालांकि, ट्रंप ने अचानक यह आमंत्रण वापस लेकर कनाडा को स्पष्ट संदेश दे दिया कि मौजूदा राजनीतिक मतभेदों के चलते उसे इस मंच से बाहर रखा जा सकता हैराजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप का यह फैसला उनके सख्त और ‘अमेरिका फर्स्ट’ रुख को दर्शाता है अपने कार्यकाल और उसके बाद भी ट्रंप कई बार सहयोगी देशों पर कड़े फैसले लेते रहे हैं कनाडा, जो लंबे समय से अमेरिका का करीबी साझेदार रहा है, इस फैसले से असहज स्थिति में आ गया है

माना जा रहा है कि व्यापार, रक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर पहले से मौजूद मतभेद इस फैसले की पृष्ठभूमि में अहम भूमिका निभा रहे हैंबताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन कनाडा की कुछ नीतियों से नाराज था, खासकर वैश्विक मंचों पर उसके स्वतंत्र रुख और कुछ अंतरराष्ट्रीय मसलों पर अमेरिका से अलग राय रखने को लेकर बोर्ड ऑफ पीस से आमंत्रण वापस लेना इसी नाराजगी का प्रतीक माना जा रहा है हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस फैसले के पीछे की वजह को लेकर कोई विस्तृत बयान जार नहीं किया गया हैकनाडा की ओर से इस फैसले पर संयमित प्रतिक्रिया सामने आई है कनाडाई अधिकारियों का कहना है कि वे शांति और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका निभाते रहेंगे साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी एक मंच से बाहर किए जाने से कनाडा की वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर असर नहीं पड़ेगा इसके बावजूद, राजनीतिक हलकों में इसे कनाडा के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,

जब वैश्विक स्तर पर कई संघर्ष और तनाव जारी हैं ऐसे में शांति से जुड़े मंचों पर सहयोग और समन्वय की जरूरत पहले से ज्यादा है ट्रंप का यह फैसला उस दिशा के उलट जाता हुआ नजर आ रहा है, जहां बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिएअमेरिका और कनाडा के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं दोनों देशों के बीच न केवल लंबी सीमा साझा है, बल्कि व्यापार, रक्षा और सांस्कृतिक संबंध भी गहरे हैं नाटो जैसे सैन्य गठबंधन और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देश साथ काम करते रहे हैं ऐसे में बोर्ड ऑफ पीस से कनाडा को बाहर करना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा हैराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है अमेरिका में आंतरिक राजनीतिक माहौल और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सख्त रुख दिखाने की रणनीति के तहत ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं इससे ट्रंप अपने समर्थकों के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि वे किसी भी देश के साथ समझौता करने के बजाय अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देंगे

वहीं, कुछ जानकार इसे भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियों की झलक भी मान रहे हैं अगर अमेरिका इस तरह सहयोगी देशों को भी सख्त संदेश देता रहा, तो वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कमजोर हो सकती है कनाडा जैसे देशों का बाहर होना इन मंचों की प्रभावशीलता पर भी असर डाल सकता हैकुल मिलाकर बोर्ड ऑफ पीस से कनाडा का आमंत्रण वापस लेना एक ऐसा फैसला है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में कनाडा और अमेरिका के रिश्ते इस फैसले के बाद किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या दोनों देश आपसी मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करते हैं या तनाव और गहराता है। फिलहाल, ट्रंप के इस कदम को कनाडा के लिए एक सुप्रीम कूटनीतिक झटका माना जा रहा है, जिसका असर वैश्विक मंच पर भी देखने को मिल सकता है
