बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही एक हैरान करने वाला और चर्चा में आने वाला दृश्य देखने को मिला है नव निर्वाचित JDU विधायक विभा देवी, जिन्हें पहले राजद से राजनीति में सक्रिय देखा गया था और जिन्हें बाहुबली की पत्नी शपथ लेने के दौरान शपथ पत्र ठीक से नहीं पढ़ पाईं। इस दौरान पास बैठी जदयू की अन्य विधायक मनोरमा देवी से उन्होंने मदद मांगते हुए फुसफुसाकर कहा (छुटकी तुम पढ़ ना सही से बता ना ) इस पूरे घटना के दौरान अन्य सभी विधायक पीछे मुड़कर उन्हें देख रहे थे और सदन में कुछ देर के लिए खामोशी और हैरानी छा गई,विभा देवी का राजनीतिक सफर कुछ समय पहले तक राजद से जुड़ा था।

2020 में उन्होंने राजद के टिकट पर नवादा से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है लेकिन 2025 आते-आते उन्होंने राजद छोड़ने का भी फैसला किया है उन्होंने इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके परिवार की उपेक्षा की और उनके खिलाफ गलत प्रचार हुआ। इसी के बाद उन्होंने जदयू की प्राथमिक सदस्यता ली और जदयू ने उन्हें नवादा से उम्मीदवार बनाया। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और अब 18वीं बिहार विधानसभा की सदस्य बनीं।शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्हें शपथ पत्र पढ़कर शपथ लेनी थी, लेकिन वे अटक गईं और सही से पढ़ नहीं पाईं। पास बैठी मनोरमा देवी को फुसफुसाकर मदद मांगना, उनके लिए और पार्टी के लिए असुविधाजनक स्थिति उत्पन्न कर गया। यह घटना न सिर्फ सदन में मौजूद अन्य विधायकों के लिए बल्कि मीडिया और जनता के लिए भी चर्चा का विषय बन गई ,शपथ पत्र किसी विधायक के लिए सिर्फ औपचारिकता नहीं है।

यह संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही का पहला कदम होता है। यदि विधायक शपथ तक ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं और मदद मांग रहे हैं, तो यह उनके तैयारी, गंभीरता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है ,विभा देवी का यह राजनीतिक सफर बताता है कि उन्होंने हाल ही में पार्टी बदली और नई जिम्मेदारी संभाली जिसकी वजह से उनकी जीत ने उन्हें नई पारी दी है, लेकिन इस शपथ समारोह में हुई यह चूक उनके लिए एक चेतावनी भी दिया है अब यह देखना बाकी है कि वे आगे अपने कार्यों, जिम्मेदारियों और जवाबदेही में कितनी मजबूती दिखाती हैं।

इस पूरे मामले ने बिहार विधानसभा और जनता दोनों में चर्चा का विषय बना दिया है। यह केवल एक व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही के प्रति गंभीर सवाल भी खड़ा करती है। जनता और पार्टी अब यह देख रहे हैं कि विभा देवी अपने पद के साथ कितनी गंभीरता और तैयारी के साथ आगे बढ़ती हैं।
रिपोर्ट
अमित कुमार
