वेटिकन सिटी,वॉशिंगटन :- कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर परोक्ष लेकिन कड़ा हमला बोला है पोप ने कहा कि किसी भी राजनीतिक, रणनीतिक या राष्ट्रीय हित के मकसद के लिए सेना का इस्तेमाल सही नहीं ठहराया जा सकता उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप एक बार फिर अपनी आक्रामक विदेश नीति और सैन्य ताकत के प्रदर्शन को लेकर सुर्खियों में हैं सेना का उपयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव बनाने या सत्ता के प्रदर्शन का साधन , युद्ध और सैन्य कार्रवाई से कभी स्थायी समाधान नहीं निकलता, बल्कि इससे आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है हालांकि पोप ने अपने बयान में सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह टिप्पणी ट्रंप की सैन्य-प्रधान सोच और उनकी पूर्व नीतियों की ओर इशारा करती है ट्रंप अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कई बार ईरान, उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान और मध्य-पूर्व को लेकर सैन्य ताकत दिखाने की बात कर चुके हैं हाल के महीनों में भी उनके बयानों में सेना के इस्तेमाल और कड़े फैसलों की झलक दिखाई दी है जब सत्ता में बैठे लोग सेना को अपने मकसद के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान मासूम लोगों को होता है

बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग युद्ध की आग में झुलस जाते हैं, जबकि राजनीतिक फैसले लेने वाले सुरक्षित रहते हैं उन्होंने इसे नैतिकता और मानव मूल्यों के खिलाफ बताया है पोप फ्रांसिस ने वैश्विक नेताओं से अपील की कि वे टकराव की जगह संवाद का रास्ता अपनाएं इतिहास गवाह है कि हथियारों से समस्याएं नहीं सुलझीं, बल्कि और जटिल हुई हैं शांति केवल बातचीत, समझदारी और आपसी सम्मान से ही संभव है सेना का काम देश की रक्षा करना है, न कि राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना सेना को राजनीति से दूर रखना लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए जरूरी है पोप के इस बयान को कई देशों में सैन्य दखल और युद्ध की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ एक मजबूत नैतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है पोप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है मानवाधिकार संगठनों और शांति समर्थक समूहों ने उनके विचारों का समर्थन किया है कई संगठनों ने कहा कि दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वहां सैन्य समाधान नहीं, बल्कि कूटनीति और सहयोग की जरूरत हैवहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि मजबूत सेना और सख्त रुख ही अमेरिका की सुरक्षा की गारंटी है

सैन्य ताकत दिखाने से दुश्मन देश पीछे हटते हैं हालांकि आलोचकों का मानना है कि यह सोच दुनिया को और अस्थिर बनाती है अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनजर पोप का यह बयान राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है ट्रंप एक बार फिर सख्त और आक्रामक छवि के साथ मैदान में हैं, जबकि उनके विरोधी शांति और कूटनीति पर जोर दे रहे हैं ऐसे में पोप की टिप्पणी ट्रंप की नीतियों पर नैतिक दबाव बढ़ा सकती है पोप फ्रांसिस का यह बयान केवल ट्रंप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सभी नेताओं के लिए एक चेतावनी है कि सत्ता और मकसद के लिए सेना का इस्तेमाल मानवता को महंगी कीमत चुकाने पर मजबूर करता है शांति ही एकमात्र रास्ता है, जो दुनिया को सुरक्षित और स्थिर बना सकता है
