ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत 17 तारीख को होने जा रही है, जब रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह को लेकर ढाका में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस मौके पर भारत समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं को आमंत्रण भेजा गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी औपचारिक निमंत्रण दिया गया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।हालांकि 17 तारीख को ही प्रधानमंत्री मोदी का मुंबई में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम है, जहां उनकी मुलाकात फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron से प्रस्तावित है इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है ऐसे में कार्यक्रमों के टकराव के कारण प्रधानमंत्री मोदी के ढाका जाने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है

भारत सरकार बांग्लादेश के शपथ समारोह में उच्च स्तरीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहती है। यदि प्रधानमंत्री स्वयं शामिल नहीं हो पाते हैं, तो विदेश मंत्री या किसी अन्य वरिष्ठ मंत्री को भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जा सकता है। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में उल्लेखनीय मजबूती आई है कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग और व्यापार के क्षेत्र में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं विशेषज्ञों का मानना है कि रहमान का शपथ ग्रहण क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच बांग्लादेश की भूमिका अहम होती जा रही है। भारत के लिए ढाका के साथ स्थिर और मजबूत संबंध रणनीतिक दृष्टि से जरूरी हैं ऐसे में शपथ समारोह में भारत की भागीदारी को प्रतीकात्मक और व्यावहारिक—दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण माना जा रहा हैमुंबई में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बैठक भी कम अहम नहीं है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सौदों, विशेषकर समुद्री सुरक्षा और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा हो सकती है

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी साझा पहल की संभावना जताई जा रही है इन परिस्थितियों में 17 तारीख भारत की कूटनीति के लिए बेहद व्यस्त दिन साबित हो सकता है। एक ओर पड़ोसी देश बांग्लादेश में सत्ता हस्तांतरण का ऐतिहासिक क्षण होगा, तो दूसरी ओर मुंबई में वैश्विक साझेदारी को मजबूती देने वाली अहम बैठक अब नजर इस बात पर है कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं ढाका जाते हैं या भारत किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराता है। दोनों ही हालात में भारत-बांग्लादेश संबंधों की निरंतरता और सहयोग का संदेश स्पष्ट रहने की उम्मीद है
