नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज भारतीय नौसेना की पनडुब्बी INS वाघषीर में यात्रा कर एक ऐतिहासिक क्षण को अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया यह ऐसे विशेष अवसरों में से एक है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने पनडुब्बी के अंदर बैठकर नौसेना के संचालन और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अनुभवों को प्रत्यक्ष रूप से जाना जाता इस प्रकार, राष्ट्रपति मुर्मू वह दूसरी राष्ट्रपति बनीं जिन्होंने सबमरीन का अनुभव लिया, इससे पहले यह अनुभव भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को प्राप्त था

राष्ट्रपति मुर्मू के इस दौरे का उद्देश्य भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली, उसकी सामरिक क्षमताओं और पनडुब्बी INS वाघषीर की तकनीकी खूबियों को करीब से समझना था इस दौरान उन्हें पनडुब्बी की कार्यप्रणाली, सुरक्षा मानक और नौसैनिक जीवन के विविध पहलुओं की जानकारी दी गई राष्ट्रपति ने अधिकारियों और चालक दल से बातचीत की और उनके अनुभवों को सराहा ,INS वाघषीर, भारतीय नौसेना की प्रमुख पनडुब्बियों में से एक है, जिसे विशेष रूप से लंबी दूरी की गश्त और समुद्री सुरक्षा मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है इस पनडुब्बी में बैठकर उसकी तकनीकी विशेषताओं का निरीक्षण किया और चालक दल की चुनौतियों और कामकाज को समझा राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नौसेना हमारे देश की सुरक्षा की एक अहम कड़ी है और इस प्रकार के अनुभव से नेताओं को भी अपनी सुरक्षा प्रणालियों की समझ बढ़ाने में मदद मिलती है विशेष रूप से यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि भारत के इतिहास में अब तक केवल दो राष्ट्रपति ही पनडुब्बी में बैठकर इसका अनुभव ले चुके हैं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने पहले इस अवसर का अनुभव लिया था और अब राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे दोहराया इस अवसर ने महिलाओं के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है, कि वे किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व और साहसिक भूमिकाओं में पीछे नहीं हैं

इस दौरे को नौसेना के अधिकारियों और मीडिया द्वारा विशेष रूप से कवर किया गया है उनके दौरे ने नौसेना कर्मियों के मनोबल को बढ़ाया और उन्हें प्रेरित किया कि वे देश की सुरक्षा के लिए पूरी लगन और समर्पण के साथ काम करें साथ ही यह दौरा आम जनता को भी यह संदेश देता है कि भारतीय राष्ट्रपति केवल प्रशासनिक और राजनैतिक कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं को जानने और समझने के लिए सक्रिय रुचि रखते हैं इस दौरे के बाद नौसेना अधिकारियों ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का अवसर था

कि राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत रूप से पनडुब्बी में बैठकर उनके काम को देखा और सराहा, INS वाघषीर की यात्रा ने राष्ट्रपति को भारतीय नौसेना की रणनीतिक भूमिका, तकनीकी क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा में उसकी अहमियत के बारे में गहन समझ दी यह कार्य केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि वे देश के सुरक्षा ढांचे और सामरिक प्रणालियों की समझ रखने में सक्रिय रूप से रुचि रखते हैं INS वाघषीर में राष्ट्रपति मुर्मू का यह सफर इतिहास में दर्ज हो गया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गया है
