अयोध्या ने एक बार फिर इतिहास रचा दिया है। अयोध्या ने मंगलवार को वह जान देखा जिसका इंतजार सदियों से किया जा रहा था रामलला के भव्य मंदिर में यह पहली बार धर्मध्वजा फहराई गई और पूरा परिसर जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। मंगलवार सुबह का यह क्षण सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि सदियों की प्रतीक्षा संघर्ष और आस्था का ऐसा संगम था जिसे करोड़ों राम भक्त अपने जीवन का सौभाग्य मान रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मंदिर की ऊँचाई पर चढ़कर धर्मध्वजा को फहराया और इस दौरान उनका भावुक होना पूरे वातावरण को और भी पवित्र बना गया। उन्होंने कहा कि (सदियों के घाव आज भर गए)यह वाक्य अयोध्या के उस लंबे इतिहास को भी दर्शाता है जिसमें मंदिर के निर्माण की यात्रा संघर्षों और बलिदानों से गुजरकर पूरी हुई है।

पूरी अयोध्या राममंदिर में उत्सव जैसा माहौल:-धर्मध्वजा फहराए जाने के साथ ही अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल बन गया मंदिर परिसर में हजारों भक्त एकत्रित हुए वहीं शहर भर में लोगों ने घरों और दुकानों में दीप भी जलाए शंख-घंटे की ध्वनि वैदिक मंत्रों का उच्चारण और जयकारों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया ऐसा लगा जैसे पूरी अयोध्या आज एक नए आरंभ का साक्षी बन गई है धर्मध्वजा की रस्सी खींचते समय और उसका भगवा रंग आकाश में लहराते हुए देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक हो उठे हुए। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों और कारसेवकों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षण उनके जीवन का सबसे पवित्र दिन है। यह सिर्फ एक ध्वजा नही करोड़ों भारतीयों की आस्था और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

राम जन्मभूमि संघर्ष की सदियों की पीड़ा आज समाप्त होती दिख रही है।प्रधानमंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में जाकर रामलला के दर्शन किए और भगवान राम के समक्ष दीप अर्पित किए इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे मोदी और भागवत ने साथ में राम दरबार की पूजा की जो कार्यक्रम को खास बनाती है। भागवत ने कहा कि यह दिन भारत की सनातन आत्मा को पुनः स्थापित करने जैसा है।धर्मध्वजा फहराने की प्रक्रिया बेहद पारंपरिक और वैदिक रीति से संपन्न कराई गई। ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ ध्वजा को शुद्ध किया गया और उस पर गंगा जल छिड़का गया और फिर उसे मंदिर की मुख्य शिखर दिशा में लगाया गया।ध्वजा पर भगवान राम, हनुमान और सूर्य वंश के पवित्र प्रतीक अंकित थे। जब मोदी ने रस्सी खींची तो मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। कई भक्तों की आँखें नम हो गईं कुछ लोग भावुक होकर जमीन पर सिर झुकाते दिखेराम मंदिर आंदोलन को 500 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है।

इस दौरान अनेक संघर्ष, आंदोलनों और कानूनी लड़ाइयों को पार करते हुए 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला दिया था 2020 में मंदिर निर्माण का शिलान्यास हुआ और 2024 में रामलला की भव्य प्राणप्रतिष्ठा हुई और अब 2025 में पहली बार मंदिर पर धर्मध्वजा फहराई गई। इसे मंदिर निर्माण की पूर्णता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
