नई दिल्ली , प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राजनीतिक रणनीति से जुड़ी संस्था I-PAC से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ED अधिकारियों पर दर्ज की गई FIR पर फिलहाल रोक लगा दी है इस फैसले को ममता बनर्जी सरकार के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि केंद्रीय एजेंसी ED को इससे बड़ी राहत मिली है मामला केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों की टकराहट, जांच एजेंसियों की भूमिका और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा हुआ हैदरअसल, I-PAC से जुड़े कथित मामलों की जांच के दौरान ED अधिकारियों की भूमिका को लेकर पश्चिम बंगाल में FIR दर्ज की गई थी राज्य पुलिस ने आरोप लगाया था कि ED अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की और कुछ मामलों में नियमों का उल्लंघन किया इसके बाद ED अधिकारियों ने इस FIR को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया उनका तर्क था कि जांच के दौरान किए गए आधिकारिक कार्यों के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना कानून के खिलाफ है और इससे केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज में बाधा उत्पन्न होगीसुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ED की ओर से कहा गया कि यह मामला राजनीतिक दबाव और बदले की कार्रवाई का उदाहरण है एजेंसी ने दलील दी कि I-PAC से जुड़े मामलों की जांच पूरी तरह कानून के दायरे में की गई थी और राज्य सरकार द्वारा FIR दर्ज कराना जांच को प्रभावित करने की कोशिश है

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कानून का संरक्षण किया है वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया कि यह सिर्फ अंतरिम आदेश है और अंतिम फैसले में सच्चाई सामने आएगी इस बीच, केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश जांच एजेंसियों के मनोबल को बढ़ाने वाला है यदि अधिकारियों को हर कार्रवाई के बाद FIR का डर रहेगा, तो भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों की जांच प्रभावित होगी। वहीं, राज्य सरकारों का तर्क है कि संघीय ढांचे में राज्यों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकतीफिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से ED अधिकारियों को राहत मिली है और बंगाल सरकार की कार्रवाई पर ब्रेक लग गया है अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या दिशा-निर्देश देता है
