ईरान में हिंसा को लेकर बड़ा दावा सामने आया है अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित ईरानी समूहों का कहना है कि देश में जारी विरोध प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 12 हजार लोगों की जान जा चुकी है दावा यह भी है कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या 30 साल से कम उम्र के युवाओं की है इन आरोपों के बीच जर्मनी ने ईरान की मौजूदा सरकार पर सीधा हमला बोला है और कहा है कि वहां की सत्ता अब ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं हैपिछले कई महीनों से ईरान के अलग-अलग शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं के अधिकार, अभिव्यक्ति की आज़ादी और राजनीतिक दमन जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं की नाराजगी खुलकर सड़कों पर दिख रही है आरोप है कि इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें गोलीबारी, गिरफ्तारियां और कथित फांसी तक शामिल हैंमानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा इंटरनेट बंद किए जाने और मीडिया पर कड़ी पाबंदियों के कारण सही आंकड़े सामने आना मुश्किल है हालांकि, विभिन्न स्वतंत्र स्रोतों और गवाहों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि मृतकों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि इनमें अधिकांश छात्र, युवा कर्मचारी और पहली बार प्रदर्शन में शामिल हुए लोग बताए जा रहे हैंईरान सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। सरकारी मीडिया का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक थे और सुरक्षा बलों ने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की सरकार का यह भी दावा है कि कई घटनाओं के पीछे विदेशी साजिश और बाहरी ताकतों का हाथ है हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के इस पक्ष को पूरी तरह स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा

इस बीच जर्मनी का बयान ईरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है जर्मनी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान में मौजूदा सरकार का “खेल लगभग खत्म हो चुका है” और वहां की सत्ता जनता का भरोसा खो चुकी है जर्मनी ने यह भी संकेत दिया कि यूरोपीय देश ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकते हैंयूरोप के कई देशों और मानवाधिकार संस्थाओं ने संयुक्त राष्ट्र से ईरान में हो रही हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग की ह शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और इसे कुचलने के लिए घातक बल का इस्तेमाल किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकताईरान में हालात को लेकर क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ रहा है। मध्य पूर्व के कई देशों में रहने वाले ईरानी प्रवासी खुलकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरें भी हालात की गंभीरता की ओर इशारा करती हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि करना मुश्किल है अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा अलग-थलग पड़ सकता है युवा आबादी की नाराजगी और आर्थिक संकट सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ईरानी नेतृत्व बातचीत का रास्ता अपनाता है या सख्ती जारी रखता है
