ढाका- बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के विरोधी और चर्चित नेता उस्मान हादी की मौत के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है उस्मान हादी को पिछले सप्ताह एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सिर में गोली मार दी गई थी, जिसके बाद उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी पहले उन्हें ढाका के अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया, जहां कई दिनों तक चले उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी उनकी मौत की पुष्टि होते ही बांग्लादेश के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने लगींउस्मान हादी की मौत की खबर फैलते ही राजधानी ढाका, चटगांव, राजशाही, खुलना और नारायणगंज जैसे शहरों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे राजनीतिक हत्या करार दिया है

कई जगहों पर सत्तारूढ़ अवामी लीग के पार्टी कार्यालयों, सरकारी वाहनों और इमारतों को निशाना बनाया गया आगजनी और पथराव की घटनाओं के चलते हालात तेजी से बिगड़ गए, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि उस्मान हादी शेख हसीना सरकार की नीतियों और कार्यशैली के मुखर आलोचक थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया सरकार विरोधी आवाजों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है लेकिन हालात को देखते हुए प्रशासन ने कुछ इलाकों में कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है।सरकार की ओर से उस्मान हादी की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया गया है शेख हसीना सरकार ने कहा है कि इस हमले में शामिल लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी साथ ही लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की गई है

हालांकि, विपक्षी दलों और हादी के समर्थकों का कहना है कि केवल आश्वासन काफी नहीं हैं और मामले की स्वतंत्र तथा पारदर्शी जांच होनी चाहिए उस्मान हादी को बांग्लादेश में एक लोकप्रिय युवा नेता और प्रभावशाली वक्ता के रूप में जाने जाते थे वे खास तौर पर युवाओं और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे और कई सरकार विरोधी आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके थे हाल के वर्षों में वे शेख हसीना सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने, विपक्ष को दबाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे आरोप लगाते रहे थे इसी वजह से उनकी छवि एक तेज-तर्रार और बेबाक नेता की बन गई थी उस्मान हादी की मौत ने बांग्लादेश में पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सड़कों पर उतर आया है, जबकि सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है फिलहाल देश के कई हिस्सों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन स्थिति को काबू में लाने की कोशिश कर रहा है अब यह देखना अहम होगा कि शेख हसीना सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और क्या उस्मान हादी की मौत की जांच से सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं
