नई दिल्ली ,संसद में डोकलाम मुद्दे को लेकर बुधवार को फिर से हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान कहा, “डोकलाम में चीनी टैंक खड़े है इस बयान ने सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी तल्खी को भड़का दिया। उनका यह कथन सुनते ही सरकार पक्ष के कई नेता और मंत्री खड़े होकर विरोध करने लगे, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया राहुल गांधी ने अपने भाषण में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद, विशेषकर डोकलाम को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर मसलों पर संसद और जनता को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। उनका इशारा था कि केंद्र सरकार इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखा रही है और गंभीर रणनीतिक मुद्दों को लेकर जवाबदेही तय करने में चूक कर रही है हालांकि, राहुल गांधी का पूरा बयान सुनने से पहले ही सत्ता पक्ष के नेता उनके भाषण में बाधा डालने लगे। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें बार-बार रोकते नजर आए।

इसके कारण विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच सदन में नोकझोंक शुरू हो गई। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डोकलाम मामला हमेशा से ही भारत-चीन संबंधों में संवेदनशील रहा है वर्ष 2017 में डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच करीब 73 दिन तक तनावपूर्ण गतिरोध देखने को मिला था। इस बार राहुल गांधी ने इसे फिर से उठाया और दावा किया कि वहां चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है सत्ताधारी पार्टी के नेता राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक रूप से अस्वीकार करते हुए कहते हैं कि यह बयान केवल राजनीतिक फायदा लेने के लिए दिया गया है भारत सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और डोकलाम में किसी तरह की कोई चुनौती या खतरा नहीं है

इस हंगामे के दौरान विपक्ष के कई सदस्य भी राहुल गांधी का समर्थन करते नजर आए उन्होंने सदन में उठे सवालों पर विस्तार से चर्चा की मांग की और कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में राजनीतिक रंग भरना उचित नहीं है। वहीं, सत्ता पक्ष ने जोर देकर कहा कि संसद में सभी मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, अफवाहों और अटकलों से राजनीतिक लाभ उठाना सही नहीं है विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में चुनावी राजनीति पर भी असर डाल सकता है। डोकलाम और सीमा सुरक्षा जैसे मसलों को लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हमेशा सुर्खियों में रहती है इसलिए, राहुल गांधी का यह बयान सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा,

बल्कि मीडिया और जनता में भी इस पर बहस होगी इस पूरी घटना ने एक बार फिर संसद में विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे तनाव को उजागर कर दिया है राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा है कि आने वाले दिनों में क्या इस बयान को लेकर कोई विशेष जांच या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, डोकलाम और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर संसद की कार्यवाही में गहन बहस का सिलसिला जारी रहने की संभावना है
