प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जॉर्डन के लिए रवाना हो गए यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि करीब 7 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री जॉर्डन की आधिकारिक यात्रा पर पहुंच रहा है PM मोदी की इस यात्रा को भारत-जॉर्डन संबंधों को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है भारत और जॉर्डन के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं,

लेकिन बीते कुछ वर्षों में वैश्विक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के चलते इन संबंधों को और गहराई देने की जरूरत महसूस की जा रही थी यह यात्रा उसी दिशा में अहम मानी जा रही है दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाएंगे इस दौरे का सबसे अहम पहलू भारत की खाद सुरक्षा से जुड़ा है जॉर्डन भारत के लिए खाद आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है भारत अपनी कुल खाद जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जॉर्डन से आयात करता है खासकर फॉस्फेट और पोटाश जैसे उर्वरकों के मामले में जॉर्डन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा भारत की कृषि व्यवस्था और किसानों की जरूरतों के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है

इस दौरे के दौरान खाद आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक समझौते, कीमतों में स्थिरता और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी बातचीत हो सकती है इसके अलावा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, भारतीय कंपनियों के लिए जॉर्डन में अवसर तलाशने और दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है इस यात्रा को पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर भी देखा जा रहा है।जॉर्डन इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक देश माना जाता है और भारत के साथ उसके संबंध भरोसे पर आधारित रहे हैं ऐसे में यह दौरा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती देगा,

बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका को भी और सशक्त करेगाकुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन दौरा भारत-जॉर्डन संबंधों के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है, जिसमें खाद सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है
