कोविड-19 महामारी के बाद देश में स्वास्थ्य पर नए संकट उभर कर सामने आ रहे हैं, जिनमें सबसे गंभीर समस्या वायु प्रदूषण को माना जा रहा है पिछले कुछ वर्षों में भारत में वायु प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ा है, जिससे लोगों में दिल और फेफड़े की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि कोविड के दौरान और उसके बाद लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हुई, और यही कारण है कि पॉल्यूशन का प्रभाव और गंभीर हो गया है खासतौर पर दिल की बीमारियों और हृदय संबंधी समस्याओं में इजाफा देखा गया है विभिन्न शहरों में नागरिक और पर्यावरण कार्यकर्ता पॉल्यूशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद में आयोजित रैलियों और मार्च में हजारों लोग शामिल हुए,

जिन्होंने सरकार से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की प्रदर्शनकारियों ने प्रदूषण पर सख्त नियम लागू करने, औद्योगिक धुएँ को नियंत्रित करने, और हरित क्षेत्रों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए अब भी समय है, लेकिन कार्रवाई में बहुत देर हो चुकी है उन्होंने लोगों को व्यक्तिगत तौर पर सावधान रहने की सलाह दी,

जैसे मास्क पहनना, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना और प्रदूषण वाले दिनों में घर के अंदर रहना विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों ने नागरिकों से अपील की है कि वे पॉल्यूशन के खिलाफ आवाज उठाएँ और सरकारी नीतियों में बदलाव के लिए सक्रिय रहें अगर प्रदूषण पर तुरंत नियंत्रण नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में दिल और फेफड़ों की बीमारियों में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।इस प्रकार, कोविड के बाद पॉल्यूशन अब भारत का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है और लोगों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाना जरूरी है प्रदूषण के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखे जा रहे हैं
